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मशरूम गर्ल की कहानी, नौकरी छोड़ मशरूम खेती अपनाई आज 2 करोड़ रु का टर्नओवर

भारत एक कृषि प्रधान देश है यहां की लगभग 52 प्रतिशत आबादी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं | वर्ष 2012 -13 में देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद का 14 .1% योगदान कृषि का है| यहां कुल क्षेत्रफल का लगभग 45% भाग शुद्ध बोया गया क्षेत्र है| भारत की जलवायु विशेषकर तापमान वर्षभर कृषि उत्पादन के अनुकूल रहता है जलवायु की विविधता के कारण भारत में उष्ण उपोषण शीतोष्ण सभी फसलें उगाई जाती हैं| भारत की कृषि भूमि के लगभग 75% भाग पर खाद्यान्न फसलें उगाई जाती हैं शेष 25% भाग वाणिज्यिक फसलों के अधीन है विनिर्माण क्षेत्र में उत्पन्न आय का 50% कृषि से ही प्राप्त होता है|

युवाओं की ख्‍वाहिश

आज के समय में पढ़ाई खत्म करने के बाद युवाओं की ख्‍वाहिश अच्‍छी जॉब और मोटी सैलरी हासिल कर लग्‍जरियस लाइफ जीने की होती है. खेती-किसानी इनकी लिस्‍ट में शायद ही होती है. इस दौर में एक ऐसी भी लड़की है, जिसने अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़कर मशरूम में खेती करना शुरू किया और देखते ही देखते करोड़पति बन गई.

सालों की मेहनत के बाद

कुछ सालों की मेहनत के बाद आज यह लड़की अपने राज्य में ‘मशरूम गर्ल’ के नाम से जानी जाती है. यह लड़की है देहरादून में रहने वाली 30 साल की दिव्या रावत. मूलत: दिव्या चमोली जिले से आती हैं. उनके पिता आर्मी में थे. जब दिव्या 12वीं कक्षा में थी, तब उनका निधन हो गया था. ऐसे में उनके लिए आगे का सफ़र आसान नहीं रहा.

12वीं क्लास की पढाई के बाद

दिव्या ने 12वीं क्लास की पढाई के बाद एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा से बीएसडब्ल्यू और एमएसडब्ल्यू (मास्टर ऑफ सोशल वर्क) की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद प्राइवेट कंपनी में 25 हजार रुपए महीने की जॉब मिल गई। अलग अलग जगह 8 नौकरियां की, उसके बाद भी उनके मन को संतुष्ट नहीं मिली। वे कुछ और बढ़िया करना चाहती थी, तो वापस अपने घर लौट आई।

दिव्या ने अपने गांव (Mothrowala village) वापस आकर 2013 में देहरादून के मोथरोवाला में एक कमरे में मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) शुरू की। दिव्या ने 100 बैग मशरूप उगाकर अपना खुदका काम शुरू किया। फिर कुछ समय बाद उनका काम चलने लगा और कमाई होने लगी। उन्हें गावं से निकलकर उनके मशरूम दूसरी जगह भी बिकने लगे। दिव्या मशरूम की खेती और बिजनेस (Mushroom Cultivation And Business) के माध्यम से लगभग 2 करोड़ रु से भी अधिक का सालाना कारोबार कर रही हैं। मशरूम उत्पादन और व्यवसाय में दिव्या ने इतना अच्छा काम किया की उन्हें उत्तराखंड राज्य सरकार ने ब्रांड एंबेसडर भी बना दिया। इसके अलावा साल 2017 में महिला दिवस के अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जी ने भी उन्हें सम्मानित भी किया था।

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