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‘दंगल’ की गीता फोगाट की बहन, खुद के दुपट्टे से मिटा डाली अपनी जिंदगी

गीता फोगाट को आप ‘दंगल गर्ल’ के नाम से भी जानते होंगे। अपने शानदार खेल प्रदर्शन से गीता फोगाट ने साल 2009-2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। गीता फोगाट के पिता महावीर सिंह फोगाट भी पहलवान हैं, जिन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाजा गया है। पिता के प्रोत्साहन और समर्थन ने गीता और बबीता फोगाट को देश की मशहूर रेसलर बना दिया। फोगाट बहनों ने काफी मेहनत की और आज बड़े मुकाम पर हैं। बात करें गीता फोगाट की तो 6 भाई बहनों में गीता सबसे बड़ी हैं। गीता फोगाट हरियाणा पुलिस में डीएसपी के पद पर कार्यरत हैं।

दंगल मूवी –

आमिर खान की दंगल मूवी को ना सिर्फ देश बल्कि दुनिया भर में अपनी बुलंदी का डंका बजाया था.यह कहानी हमारे हिंदुस्तान की रियल लाइफ हीरो फोगाट सिस्टर्स की थी.गीता फोगाट और बबीता फोगाट कुश्ती की दुनिया का बड़ा नाम है,जिन्होनें अंतराष्ट्रीय स्तर और अपना और अपने देश का नाम चमकाया है.मगर जब परिवार में बड़े इतने सफल साबित हो जाये तब छोटो पर उम्मीदें और ज़्यादा बढ़ जाती है.कई बार इन उम्मीदों का भार छोटे सहन नहीं कर पाते हैं और वे ऐसा कदम उठा लेते हैं जो उन्हें नहीं उठाना चाहिए.

गीता और बबिता की ममेरी बहन रितिका ने भी एक ऐसा ही कदम उठा चुकी है

आपको बता दें कि गीता और बबिता की ममेरी बहन रितिका ने भी एक ऐसा ही कदम उठा चुकी है जिसने उन्हें हमेशा के लिए दुनिया से दूर कर दिया है. आपको बता दें कि रितिका भी अपनी बहनों गीता और बबिता की तरह कुश्ती की खिलाड़ी थी, गौरतलब है कि उनका भी सपना था कि वो भी अपनी बहनों की तरह परिवार और समाज का नाम रोशन करें और देश के लिए मैडल जीत कर लाए. दरअसल इसके लिए वो काफी मेहनत भी कर रही थी, हालाँकि करियर की शुरुआती कुश्ती यानी स्टेट लेवल सब जूनियर कॉम्पिटिशन में हार मिलने के बाद वो बुरी तरीके से निराश हो गई थी. वहीं मीडिया से प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह टूर्नामेंट 12 से 14 मार्च के दरमियान भागलपुर में संपन्न हुआ था.

 कॉम्पिटिशन में रितिका फाइनल तक भी आ चुकी थी.

दरअसल इस कुश्ती कॉम्पिटिशन में रितिका फाइनल तक भी आ चुकी थी. मगर फाइनल मैच में वो सिर्फ एक नंबर से बाहर हो गई थी. वहीं इस हार ने रितिका को बुरी तरह से तोड़ कर रख दिया था और अंत में उन्होंने खुद को खत्म करने का फैसला कर लिया था. हालाँकि मीडिया से प्राप्त जानकारी के मुताबिक अर्जुन अवॉर्ड विजेता महावीर फोगाट भी उस प्रतियोगिता में गए हुए थे. आपको बता दें कि रितिका ने पंखे में अपना दुपट्टा डाल कर अपने जीवन को पूरी तरह खत्म कर दिया. हालाँकि फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच करने में लगी हुई है.

दरअसल यह खबर पढ़ रहे हर व्यक्ति से हम बस इतना ही कहना चाहते है कि ज़िन्दगी बहुत खूबसूरत होती है. और एक हार आपका पूरा जीवन नहीं बन सकती है. हालाँकि वहीं खबर पढ़ रहे लोगों से हम बस इतना ही कहना चाह रहे है अपने बच्चों को समझे, उनसे बातें करते रहे. किसी और के जैसे उन्हें बनाने से बेहतर है, उन्हें खुद को खोजने मे मदद करें. और इस खोज में आप उनके साथी बन जाए, आपको अपने बच्चों के साथ एक दोस्त जैसे व्यवहार करना चाहिए, उन्हें सही रास्ता दिखाना चाहिए.

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