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जानें कितनी है देश की सबसे अमीर महिला की नेट वर्थ

दोस्तों, आज हम आपको भारत की सबसे अमीर महिला के बारे में बताने जा रहे हैं| $14.4 बिलियन के साथ ये महिला देश की सबसे अमीर महिला हैं| जितनी यह महिला अमीर हैं, उतना ही सादा जीवन ये जीती हैं| यह इतनी सादगी से अपना जीवन बसर करती हैं की आप इन्हें देख कर यह अनुमान नहीं लगा पाएंगे की यह भारत देश की सबसे अमीर महिला हैं|

जानें कौन हैं हमारे देश की सबसे अमीर महिला

अपने पति के गुज़र जाने के बाद अपने परिवार की देखभाल करना और अपने दिवंगत पति के सार्वजनिक कार्यों को जो जारी रख रही हैं वह कोई और नहीं बल्कि सावित्री जिंदल हैं, जिनकी कुल संपत्ति 14.4 बिलियन डॉलर है। एक स्वघोषित पुरुष की दुनिया में एक महिला होने का एक अद्भुत उदाहरण सावित्री जिंदल – चेयरपर्सन एमिरेटस, जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड है। वह एक इतनी साधारण महिला हैं की किसी भी चीज़ की चकाचौंध उन्हें बिलकुल भी प्रभावित नहीं करती है। सावित्री जी एक साधारण साड़ी पहनती हैं जिसके पल्ले से सावित्री जी हमेशा अपना सर ढकती हैं|

देश की सबसे अमीर महिला होने के बाद भी साधारण जीवन जीती हैं सावित्री जी

सावित्री जी सबसे ज़्यादा खुश तब होती हैं, जब आप उनसे उनके बच्चों और दिवंगत पति के बारे में बात करें| पति की एक हेलीकाप्टर क्रैश में 2005 में मृत्यु के बाद सावित्री जी ने अपना बिज़नेस संभाला| इससे पहले उनके परिवार की यही परंपरा थी की घर के आदमी बाहर का काम संभालेंगे, और औरतें घर का| लेकिन उनके पति के चले जाने के बाद सावित्री जी ने बिज़नेस की ज़िम्मेदारी अपने कन्धों पर ले ली, और आज इन्होने अपने बिज़नेस को इस मुकाम पर पहुंचा दिया है की सावित्री जी देश की सबसे अमीर महिला बन गयी हैं|

सावित्री जिंदल का शीर्ष पर चढ़ना समूह के लिए भाग्यशाली साबित हुआ है। पिछले पांच वर्षों में इनका कारोबार लगभग चौगुना हो गया है| लेकिन सावित्री जिंदल ज़्यादा अपनी पब्लिक लाइफ पर फोकस करती रहती हैं। वह आम तौर पर व्यवसाय की जल्दबाजी से दूर रहती है और सप्ताह में तीन दिन हिसार निर्वाचन क्षेत्र में बिताती है, जिसका वह हरियाणा विधानसभा में प्रतिनिधित्व करती है और जहां उनके दिवंगत पति ने पांच दशक पहले एक बाल्टी निर्माण इकाई स्थापित करके अपना करियर शुरू किया था।

सावित्री जिंदल के पति ओपी जिंदल भारत के सबसे महान अशिक्षित इंजीनियरों में से एक थे। वह अक्सर अपने कारखानों की अधिकांश मशीनों को स्वयं डिजाइन करते थे। यह वही इंजीनियरिंग कौशल है जिसने उन्हें कुछ वर्षों के भीतर एक विशाल औद्योगिक साम्राज्य स्थापित करने में मदद की।

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