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पंकज त्रिपाठी ने कठिनाइयों को पार कर के कैसे हासिल किया बॉलीवुड में यह मुक्काम आखिरकार राज़ खोला!

बॉलीवुड में “कालीन भईया” से पहचाने जाने वाले कलाकार का नाम असल जिंदगी में पंकज त्रिपाठी है । पंकज का होटल के एक कर्मचारी होने से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक का सफर आसान नहीं था पर इस सफर में उनका किन चीजों ने साथ दिया यह जानने के लिए आगे पढ़ते रहिए।

कैसे शुरूआत हुई फिल्मों में?

पंकज त्रिपाठी का अभिनेता बन्ने का सफर इतना आसान नहीं था। कल जो पंकज करोड़ो की भीड़ में गिना जाता था आज उस्सी ने अपने कठिन परिश्रम से आज अपना हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में यह मुकाम बनाया है। पंकज ने बॉलीवुड में कदम फिल्म में छोटी भूमिकाएं निभा कर किया था। उन्हे सबसे पहले रन और ओमकारा फिल्म में एक छोटे से रोल में देखा गया और तबसे लेकर आज तक उन्होनें 60 से ज़्यादा फिल्म या टेलीविजन नाटक में देखा गया है। पंकज का सिक्का “गैंग्स ऑफ़ वासेपुर” नाम की फिल्म सीरीज के द्वारा चला था जिसका पहला भाग 2012 में रिलीज़ हुआ था। गैंग्स ऑफ़ वासेपुर के कारण ही बॉलीवुड के सेलिब्रिटी ने पंकज को पहचानना शुरू किया था। उन्होंने अपनी ऐक्टिंग के लिए सबसे ज्यादा वाह वाही अगर बटोरी है तो वह “मसान”, “बरेली की बर्फी” और “नील बट्टा सन्नाटा” है।पंकज एक अद्भुत कलाकार है और जिस चीज़ के लिए वह सबसे ज़्यादा मशहूर है वह चीज़ है इनकी कॉमिक टाइमिंग।पंकज की कॉमिक टाइमिंग कमाल की है और इस चीज का उदाहरण तो आप सभी लोगो ने “स्त्री” और “फुकरे” फिल्म में भी देखा होगा। उनके लिए यह सफर आसान नहीं था पर जिस मुकाम पर आज वह है उसकी वजह उनकी हार ना मानने वाली ज़िद, परिश्रम और उनकी बीवी मृदुला त्रिपाठी।

स्ट्रगलिंग दिनों में बीवी थी इकलौता सहारा!

पंकज ने वर्ष 2004 में मृदुला से शादी कर ली थी। उस टाईम पर पंकज एक स्ट्रगलिंग अभिनेता थे और कमाई का कोई पक्का जरिया नहीं था। उस टाईम पर उनकी बीवी ने अपनी नौकरी के कमाई से उन दोनो का घर चलाया और पंकज को हिम्मत देती रही की उनके अच्छे दिन जल्द ही आयेंगे। पंकज की बीवी इस बात का जीता जागता उदाहरण है की हर पुरुष की सफलता के पीछे उस महिला का हाथ होता है। पंकज ने यह तक बताया था की वह जिस गांव से आते है उस गांव में लोगो के पास चुलाह जलाने के लिए माचिस तक नहि होती थी और अलार्म क्लॉक खरीदने के पैसे तो होते नही थे पर ट्रेन की आवाज़ सुनके गांव को पता चलता था की कितना टाइम हो रहा है तो वह ट्रेन की आवाज़ से जागते थे। पंकज ने यह भी बताया की उनमें इतना जो धैर्य है उसकी वजह यही है की वह प्रकृति के काफी करीब रहे है। गांव में उन्हे ज़्यादा कुछ मिले या ना मिले पर वाहा साफ हवा और सुकून जरूर था। पंकज और मृदुला की एक पुत्री भी है जिसका नाम आशी है।

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