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मां बच्चे को पुकारती रही, उठ जा मेरे बेटे, फिर अचानक चलने लगीं मासूम की सांसें, डॉक्टरों ने घोषित कर दिया था मृत

हरियाणा के बहादुरगढ़ में हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बहादुरगढ़ के किला मोहल्ले के निवासी विजय शर्मा के पोते कुनाल शर्मा को 26 मई को दिल्ली के एक अस्पताल के डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था. इतना ही नहीं बच्चे को मृत बताकर उसे पैक करके परिजनों को सौंप दिया था परंतु चमत्कार हुआ. घर जाकर वह बच्चा फिर से जिंदा हो गया. अब रोहतक के एक निजी अस्पताल से बच्चा वापस अपने घर पहुंच चुका है. दरअसल, जब माता-पिता चारों तरफ से निराश होकर बहादुरगढ़ अपने घर पहुंचे तो मां जान्हवी और बच्चे की ताई अन्नू ने रोते हुए उसे बार-बार प्यार से हिलाकर पुकारा. मां लगातार उसे जिंदा होने के लिए पुकार रही थी. कुछ देर बाद बच्चे की सांस चलने लगी.

ऐसा कहा जाता है कि

इस दुनिया में भगवान आज भी मौजूद है, जिसकी वजह से लोगों में भगवान के प्रति आस्था अटूट देखने को मिलती है। समय-समय पर ऐसे कई चमत्कार होते हैं, जो ईश्वर की उपस्थिति का आभास दिलाते हैं। अक्सर कई खबरें सुनने में आती हैं जिसको जानने के बाद इंसान को विश्वास नहीं होता है। जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं इस दुनिया में सबसे बड़ा सच मृत्यु है। जिसने जन्म लिया है वह एक ना एक दिन इस दुनिया को छोड़ कर जरूर जाएगा।आपने कभी ऐसा सुना है कि मृत इंसान पुनः से जीवित हो गया हो? जी हां, वह कहते हैं ना कि जन्म और मरण यह दोनों ऊपर वाले के हाथों में होता है। जब तक ईश्वर नहीं चाहता है तब तक इंसान का जन्म धरती पर नहीं हो सकता है और ना ही इंसान की मृत्यु हो सकती है।

आज हम आपको एक ऐसे ही चमत्कार के बारे में जानकारी देने वाले हैं, जिसको जानने के बाद आपको भी ईश्वर पर विश्वास हो जाएगा। दरअसल, हरियाणा में एक ऐसी घटना घटी है जिसे जानने के बाद आप सभी लोगों को शायद यह किसी फिल्म की कहानी की तरह लगे परंतु यहां पर मरा हुआ बच्चा अपनी मां की पुकार सुनकर दुबारा से जीवित हो गया है।

दादी की जिद ने लौटाई जिंदगी

बच्चे के पिता कुणाल को लेकर अपने साले के घर पहुंचे और वहीं पर उसका अंतिम संस्कार करने की तैयारी चल रही थी लेकिन दादी ने जिद करते हुए कहा कि उसे अपने पोते की शक्ल देखनी है और उसे पैतृक घर पर लाया जाए. तब कुणाल के पापा उसे घर लेकर आये. दादी अगर कुणाल की शक्ल देखने की जिद ना करती तो कुणाल का अंतिम संस्कार हो चुका होता. कुछ देर बाद कुणाल के शरीर में कुछ हरकत दिखी तो परिजनों को उम्मीद जगी.इसके बाद पिता हितेश ने बच्चे का चेहरा चादर की पैकिंग से बाहर निकाला और अपने लाडले को मुंह से सांस देने लगे. कुछ देर बाद जब कुणाल के शरीर में कुछ हरकत दिखाई दी तो पड़ोसी सुनील ने बच्चे की छाती पर दबाव देना शुरू किया. इसके बाद मोहल्ले के लोग बच्चे को 26 मई की रात को उसे रोहतक के एक प्राइवेट अस्पताल में ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे 15 फीसदी ही बचने की संभावना बताई पर वह धीरे-धीर ठीक हो गया और मंगलवार को अपने घर पर पहुंच चुका है.

बच्चे के दादा विजय शर्मा ने बताया कि पोते की मौत पर रात को नमक की बोरी और बर्फ की व्यवस्था कर दी थी. मोहल्ले वालों को सुबह श्मशान घाट पर पहुंचने को कह दिया था लेकिन चमत्कार हो गया. मां ने कहा कि भगवान ने उनके बेटे में फिर से सांसें डाली हैं. अब कुणाल स्वस्थ है. रोहतक अस्पताल से नानी के घर है. साथ में उसकी मम्मी है. वह बच्चों के साथ खेल रहा है और डांस कर रहा है.

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