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ला ट्रोब विश्वविद्यालय ऑस्ट्रेलिया, ने शाहरुख ख़ान के सम्मान में छात्रों को दिया ये तोहफा

शाहरुख़ खान का जन्म 2 नवम्बर 1965 को न्यू-दिल्ली में हुआ। उन्होंने अपने जीवन के पहले पाच साल मँगलोर में बिताये। जहा 1960 में उनके नाना इफ्तियार अहमद एक इंजिनियर थे। और उनके दादा जान मुहम्मद अफगानिस्तान के जातीय पठान थे। खान के पिता मीर ताज मोहम्मद खान ब्रिटिश इंडिया के पेशावर (अभी का पकिस्तान) के स्वतंत्रता सेनानी थे। 2010 तक खान का पैतृक परिवार किस्सा खावानी बाज़ार के शाह वाली क़ताल गली, पेशावर में रहते थे।शाहरूख के करियर की शुरूआत टेलीविजन से हुई थी। दिल दरिया, फौजी, सर्कस जैसे सीरियल्स से उन्होंने अपनी पहचान बनाईा उनके फिल्मी करियर की शुरूआत फिल्म ‘दीवाना’ से हुई थी

जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला था। उस समय यह फिल्म सुपरहिट हुई और इसी फिल्म ने शाहरूख को हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित किया। इसके बाद शाहरूख ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और वे लगातार सफलता की सीढि़यों पर चढ़ते गए। धीरे धीरे वे आलोचकों के साथ साथ जनता की पसंद बन गए और लड़कियों के बीच तो काफी प्रसिद्ध हो गए|

संस्था ‘मीर फाउंडेशन’ का गठन

शाहरुख ने अपने पिता मीर ताज मोहम्मद खान के नाम पर इस संस्था ‘मीर फाउंडेशन’ का गठन किया था और इसके माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने का काम जमीनी स्तर से किया जाता है. इसमें मुख्य रूप से एसिड अटैक से पीड़ित महिलाओं की सहायता की जाती है।

शाहरुख खान ला ट्रोब यूनिवर्सिटी पीएचडी स्कॉलरशिप का उद्देश्य

भारतीय महिला शोधकर्ताओं को वर्तमान समय की बढ़ती चुनौतियों के समाधान की तलाश करने में मदद करने के लिए शोध करने को प्रेरित करना है, पिछले 10 वर्षों के भीतर मास्टर्स बाइ रिसर्च डिग्री (या समकक्ष) पूरी करने वाली भारतीय महिला नागरिक ही सफल उम्मीदवार की पात्र होगी।
इसके तहत उम्मीदवार को चार वर्षीय रिसर्च छात्रवृत्ति के तौर पर 2000,000 (AUD) डॉलर की मदद की जाएगी. शोध कार्य को आस्ट्रेलिया के मेलबर्न स्थित ला ट्रोब की अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ पूरा करना होगा। इन उम्मीदवारों को विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य, खेल, सूचना प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा या इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रमुख विशेषज्ञों के पर्यवेक्षण में अपना शोध कार्य पूरा करने का मौका मिलेगा।

4 बार शाहरुख को डॉक्टरेट की उपाधि दी

इससे पहले 4 बार शाहरुख को डॉक्टरेट की उपाधि दी जा चुकी है, सबसे पहले उन्हें 2009 में ब्रिटिश यूनिवर्सिटी ऑफ बेडफोर्डशायर ने सम्मानित किया था। इसके बाद उन्हें 2015 में एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी की तरफ से ऑनरेरी डॉक्टरेट की उपाधि दी गई। तीसरी बार उन्हें 2016 में हैदराबाद की मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के जरिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी गई। वहीं चौथी बार उन्हें अप्रैल 2019 में लंदन विश्वविद्यालय से एक डॉक्टरेट द्वारा सम्मानित किया गया है।शाहरुख़ खान ने 20 फ़रवरी 2020 को मुंबई के एक पांच सितारा होटल में आयोजित समारोह में केरल के त्रिचूर इलाके से संबंध रखनेवाली PhD रिसर्च स्कॉलर छात्रा गोपिका कोट्टाथराईल भसी को पहली ‘Shah Rukh Khan La Trobe University PhD Scholarship’ से सम्मानित किया था, जो पशु विज्ञान, इकोलॉजी और मोलिक्यूलर स्टडी के माध्यम से ख़ेती से जुड़ी गतिविधियों में सुधार लाने पर रिसर्च करना चाहती हैं। गोपिका कोट्टाथराईल भसी का चयन 800 भारतीय महिला प्रतियोगियों से किया गया था।

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