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साधारण शिक्षिका कैसे बनी 22.3 हज़ार करोड़ रूपये की मालकिन, जानें दिव्या की प्रेरणादायक कहानी

साधारण शिक्षिका से 22.3 हज़ार करोड़ की मालकिन बनना दिव्या के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था. एक साधारण से परिवार में जन्म लेने के बावजूद दिव्या ने जिस सूझ बूझ और समझदारी से अपने जीवन का फैसला लिया , इसी ने आज दिव्या को उस पद पर ला खड़ा किया है की आज दिव्या का नाम फोर्ब्स के सबसे कम उम्र की दूसरी धनवान व्यक्ति के रूप में शामिल है जो सच में एक बहुत बड़ी बात है. सफलता तो सभी पाना चाहते हैं , लेकिन जो उसको पाने के लिए उस आग में जलने को तैयार रहता है , सफलता उसी के कदम चूमती है.

साधारण शिक्षिका

कैसे बनी एक साधारण शिक्षिका करोड़ों की मालकिन, क्या जानते हैं आप ?

दिव्या का जन्म बेंगलोर के एक साधारण से परिवार में हुआ. नई दिल्ली से दिव्या ने अपनी स्कूल शिक्षा पूरी की और उसके बाद कर्नाटक के आर.वी. कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग से दिव्या ने बायोटेक्नोलॉजी में बी.टेक. करके अपने स्नातक की पढ़ाई पूरी की. दिव्या आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाना चाहती थीं इसीलिए उन्होंने बायजू कोचिंग क्लासेज में एडमिशन लिया और जी आर ई के पेपर की तैयारी करने लगीं. अपनी परीक्षा देने के बाद जब दिव्या अपने रिजल्ट का इंतज़ार कर रही थीं तो उन्हें बायजू कोचिंग क्लासेज के संस्थापक ने उन्हें कोचिंग क्लास में टीचर बनने का मौका दिया जो दिव्या ने स्वीकार कर लिया. इसी बीच दिव्या का रिजल्ट भी घोषित हो गया और वो सेलेक्ट हो गयीं पर उन्होंने समझदारी दिखाई और यहीं रूककर कोचिंग क्लासेज में पढ़ाना स्वीकार किया.

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साधारण शिक्षिका से करोड़ों की मालकिन बनने तक का दिव्या का सफर

जब दिव्या एक शिक्षिका की तरह बायजू कोचिंग क्लासेज से जुड़ गयीं तो इसी बीच कोचिंग संस्थान के मालिक को इनसे प्यार हो गया और दोनों ने शादी कर ली. इसके बाद इन्होने एक ऐप लांच की ‘थिंक एंड लर्न’ जिसका डायरेक्टर दिव्या को बनाया गया. दिव्या ने ऐप को सफल बनाने में पूरी जान डाल दी. दिव्या यहां सिलेबस और कंटेंट प्रदान कराने के लिए ज़िम्मेदार थीं.

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दिव्या ऐप के द्वारा बच्चों को सिखाती की कैसे आपको कॉम्पिटिटिव परीक्षा में सवाल हल करने हैं. बच्चों का भी रुझान ऑनलाइन शिक्षा की तरफ बढ़ता गया और ऐप सफलता की राहों में आगे बढ़ती गयी. दिव्या एक बहुत ही प्रतिभाशाली शिक्षिका हैं इसीलिए बच्चे भी इन्हें खूब इज़्ज़त और स्नेह देते हैं. और दिव्या का यही कठिन परिश्रम है की दिव्या आज एक आलिशान जीवन जी रही हैं.

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