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साधारण लड़की से मिस यूनीवर्स बनी सुष्मिता है महिलाओं की प्रेरणा!

1994 में  मिस यूनिवर्स बनके भारत का नाम उचा करने वाली सुष्मिता सेन हर नारी के लिए एक प्रेरणा है। एक आत्मविश्वास हीन बच्ची  से लेकर बुज़ुर्ग औरत पूरी औरत कॉम के लिए  प्रेरणा की मिसाल है।  सुष्मिता भारतीय थी जिसने मिस यूनिवर्स का खिताब जीता। मिस यूनिवर्स बन्ने के बाद सुष्मिता को कई फिल्मों में काम करने का मौका मिला और वही से मॉडल सुष्मिता का अभिनेत्री के तौर पर कैरियर शुरू हुआ।

दो लड़कियों को एडॉप्ट किया था!

सुष्मिता सेन बीवी नंबर 1, मैं हू ना, मैने प्यार क्यों किया?, आँखें जैसी फिल्मों का हिस्सा रह चुकी है। सुष्मिता एक बंगाली परिवार से है और उनके पिता भारतीय वायु सेना में विंग कमांडर रह चुके है व उनकी माता ज्वैलरी डिज़ाइनर रह चुकी है। उनके एक भाई भी है जिनका नाम राजीव सेन है । सुष्मिता ने 25 साल की उम्र में ही एक बच्ची को एडॉप्ट कर लिया था। बिन शादी के बच्चा एडॉप्ट करना कोई आसान बात नहीं पर सुष्मिता ने बच्ची एडॉप्ट कर के समाज में साबित कर दिया की सिर्फ जन्म देने से ही एक महिला मां नही बन जाति । एक बच्चे की परवरिश करना और उसका ध्यान रखना भी एक मां बन्ने का हिस्सा है । यहीं नही सुष्मिता ने कुछ सालो बाद ही एक और बच्ची को भी एडॉप्ट कर लिया था। सुष्मिता अब दो बच्चियों की मां है।

मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता से पहले डगमगाया था सुष्मिता का आत्मविश्वास!

लोगो को सुष्मिता की खूबसूरती देखकर लगता है की उनके लिए मिस यूनिवर्स का खिताब जीतना एक आसान कार्य होगा पर ऐसा बिलकुल भी नहीं था। सुष्मिता ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया की उन्होंने खिताब जीतने वक्त जो ड्रेस पहना था वो कोई ब्रांड का नही था वह दिल्ली के सरोजनी नगर के टेलर से ही दिलवाया गया था और उन्होंने हाथ में जो ग्लोजेस पहने थे वो सॉक्स से बनाए गए थे। सुष्मिता ने अपनी मां से कहा था की उन्हे काफ़ी दर लग रहा है की वह खिताब जीत नही पाएंगी पर उनकी मां ने कहा  यह समय अपना आत्मविश्वस दामाडोल करते का नही बल्की खुद पर भरोसा करने का है , तुम जीतो या हारो तुम्हे प्रतियोगिता में हिस्सा जरूर लेना चाहिए । उनकी मां की बातों ने जैसे अनवर जादू ही कर दिया हो और उनके शब्दो के कारण सुष्मिता में एक अलग ही विश्वास जाग उठा था जिससे उन्होंने ना ही सिर्फ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया बल्की वह विजेता भी बननी । अपने किस्से को बताते हुए वह हर उस नौजवान को समझाती है की अपने उप्पर विश्वास रखे और कभी भी अपने उप्पर डाउट ना करे। अपने उप्पर विश्वास रखना ही जीत की तरफ पहला कदम होता है।

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