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कंडोम से लेकर अंडरगार्मेंट तक कि एडवर्टिजमेंट में काम कर चुकी है भरतनाट्यम नर्तकी सुपर्णा भूषण सूद

मैं 57 वर्ष की हूं और आज भी अपने पैरों पर थिरकती हूं, बच्चों को डांस सिखाती हूं, रामलीला में अलग-अलग किरदारों में उतकर ड्रामा करती हूं और महिलाओं को कुछ सीखने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हूं। मैं हूं भरतनाट्यम डांसर सुपर्णा भूषण सूद।

छोटी उम्र से है नृत्य का सौख

4 साल की थी जब पहली बार डांस करना सीखा और तब से लेकर अबतक संगीत से ऐसी जुड़ी कि डांस के कई फॉर्म सीखे, गायिका बनी, वादक बनी, ड्रामा किया एक्ट्रेस बनी, मॉडलिंग की और एडवर्टिजमेंट में काम किया। लोगों के ताने भी सुने मगर खुद को कभी रोका नहीं। अपनी कला के दम पर देश-विदेश में भारत की संस्कृति का प्रचार किया। अब सोशल वर्क में खुद को समर्पित कर चुकी हूं, बच्चों को टैलेंट को उभारने का काम करती हूं।

मेरी मां ने खाई थी कसम अपनी बेटी को बनाऊंगी डांसर

मां चंद्र लता भूषण राजशाही परिवार से रही हैं। वह बिजनौर जिले के अंदर आने वाले छोटे से शहर ‘राजा का ताजपुर’ में राजा के घराने से आती हैं, उनके दादा अपने समय के राजा थे। शाही परिवार का हिस्सा होने के कारण उन्हें कई फायदे मिले, मगर पाबंंदियां भी झेलनी पड़ीं। मेरा मां को संगीत-नृत्य में बहुत दिलचस्पी थी मगर उनके परिवार ने यह सब सिखाने के लिए साफ मना कर दिया। यही कहा गया कि अच्छे घरों की लड़कियां ये सब नहीं करतीं।

बस उसी वक्त से मेरी मां ने भी कसम खा ली थी कि अपनी बेटी को बस वही चीजें सिखाएंगी और कराएंगी जो उन्हें कभी करने की इजाजत नहीं मिली। जब शादी हुई तो वह मेरे पिता के परिवार में आई, पिता कश्मीरी पंडित थे और उनके परिवार में भी पुराने रीति-रिवाज़ों को काफी माना जाता था। इस बीच 1965 में मेरा जन्म हुआ, जिसके 2 साल बाद ही मेरी मां और पिता कोलकाता आ गए। यहीं से मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।

भरतनाट्यम के साथ कथक, कुचीपुड़ी और हिंदुस्तानी क्लासिकल पर भी पकड़

मैं डांस सीख ही रही थी कि मेरी मां ने मुझे हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन की भी ट्रेनिंग दिलाई। स्कूल की पढ़ाई करने के बाद मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में बीए ऑनर्स की पढ़ाई की। इसके साथ ही इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की प्रयाग संगीत समिति से संगीत प्रभाकर का कोर्स किया। लखनऊ विश्वविद्यालय के भातखंडे संगीत विद्यापीठ से संगीत विशारद कोर्स किया। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से प्राचीन कला केंद्र से भी भरतनाट्यम का कोर्स किया। इस बीच मैंने कुच्चीपुड़ी, कथक डांस और कार्नेटिक व हिंदुस्तानी क्लासिकल म्यूजिक सीखा है। संगीत उपकरण बजाने की बात करें तो मुझे तबला, गिटार, हारमोनियम और सितार भी बजाना आता है।

कंडोम से लेकर अंडरगार्मेंट और दिल्ली पुलिस से लेकर हेयर ऑयल के एडवर्टिजमेंट में किया काम

भारतीय सांस्कृतिक नृत्य कला में उपलब्धि हासिल करने के बाद जब मैं मॉडलिंग की दुनिया में पहुंची तो मुझे कोई दिक्कत नहीं आई, हां कुछ लोग बातें जरूर बनाते थे। मगर मेरे माता-पिता ने मेरा हर वक्त साथ दिया। 1980 से 90’s तक मैंने यूपी हैंडलूम्स, केश निखार सोप, हेमपुष्पा, टॉप्स नूडल्स, लॉर्ड्स शैंपू, पैस्को सोप और कई सरकारी प्रिंट एडवर्टिजमेंट जैसे दिल्ली पुलिस, भारतीय रेलवे में काम किया। इसके बाद मैंने कुछ बोल्ड एडवर्टिजमेंट जैसे कि कंडोम और कॉन्ट्रासेप्टिव व अंडरगार्मेंट्स के एड में काम किया। इसमें भी मैं अपनी शर्तों पर काम करती थी। मैंने साफ कहा कि मैं अपने पहनावे को साफ-सुथरा रखूंगी और मेरी बात मानी भी गई।

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