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बिहार न्यायिक सेवा में सफल होकर बनी जज, बेटी ने पिता नाम किया रौशन बिहार

संतुलित समाज के निर्माण में बेटी का विशेष महत्‍व है। बेटी ओस की बूंद सी होती है। आज वह जीवन के हर क्षेत्र में परचम लहरा रही है। हालांकि कुछ सामाजिक कुरीतियां बेटी के सपनों पर अंकूश लगाने का काम करती है। जिसका बहिष्‍कार होनी चाहिए।

आइये जानते है उस बेटी के बारे में जिसने सभी के लिये बहुत ही खुबसूरत मिसाल कायम किया है:

अर्चना मूल रूप से पटना  के धनरूआ थाना क्षेत्र के अंतर्गत मानिक बिगहा गांव की रहने वाली हैं। इनके पिता का नाम गौरीनंदन प्रसाद है तथा माता का नाम प्रतिमा देवी है। इनकी मां 7वीं कक्षा तक पढ़ी है। अर्चना अपने चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। इनकी उम्र 34 वर्ष है। अर्चना ने वर्ष 2018 में 30वीं बिहार न्यायिक सेवक परीक्षा में कामयाबी हासिल किया है। नवंबर महीने के अन्तिम सप्ताह में जारी परिणाम में अर्चना ने सामान्य श्रेणी में 227 वां तथा OBC कैटेगरी में 10वीं रैंक हासिल की है। अर्चना का यह सफर बहुत संघर्षपूर्ण रहा है।

अर्चना की शिक्षा

अर्चना को बचपन से ही अस्थमा की बिमारी थी। इस वजह से वह बहुत बीमार रहती थी। घर में गरीबी ने भी अपनी जगह बनाए हुए थी। अर्चना ने 6 वर्ष की उम्र से ही जज बनने का सपना देखा था। इन्होंने पटना के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय, शास्त्रीनगर से 12वीं पास किया है। उसके बाद अर्चना ने पटना यूनिवर्सिटी (Patna University) से साइकोलॉजी ऑनर्स किया है। स्नातक की पढ़ाई करते समय वर्ष 2005 में उनके पिता की अक्समात देहांत हो गई।

उनकी ज़िन्दगी एक नए मोड़ पर आ गई जब

अब यहाँ उनकी ज़िन्दगी एक नए मोड़ पर आ गई जब उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया। इस तरह उनकी जिम्मेदारियाँ और भी बढ़ गई। लेकिन फिर भी उन्होंने अपनी पढ़ाई को ड्रॉप नहीं किया और एलएलएम (LLM) डिग्री पूरी करने के लिए दिल्ली चली गई और तैयारी करने लगी। आगे अर्चना ने बताया कि उनके पिता को एक सर्वेंट क्वार्टर मिला था और उनके क्वार्टर के ठीक सामने जज की कोठी थी। वह अपने पिता को पूरे दिन जज के सामने खड़ा रहते हुए देखा करती थी। कहीं ना कहीं यही बात उनके लिए प्रेरणा बनी कि वह मेहनत करके जज बन सकती हैं और अपने इस प्रेरणा को अर्चना ने सच कर दिखाया, जब उन्होंने 2018 में बिहार न्यायिक सेवा की परीक्षा में सफलता हासिल की। इस तरह अर्चना अपने पिता और जज की कोठी से प्रेरणा लेते हुए और साथ ही अपने मेहनत और अपने पति के सहयोग के कारण एक महिला जज बन चुकी हैं।

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