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ऑस्ट्रेलिया से आयी महिला को जब हुआ एक पुजारी से प्यार, तो अपने चार साल के बच्चे संग वह

भारतीय संस्कृति एक ऐसी संस्कृति है जो सभी को अपनी ओर प्रभावित करती है| एक बार अगर कोई इस संस्कृति से जुड़ता है तो वह हमेशा के लिए यही का हो जाता है| हमने अक्सर देखा है की कितने लोग विदेश से भारतीय संस्कृति देखने आते हैं, परर उन्हें यहां इतना अच्छा लगता है की वे बस यही के हो जाते हैं, और अपना आगे का जीवन यहीं बिताते हैं| इस संस्कृति में एक अपनापन है जो सभी को यहां से जोड़ता है| ऐसी ही कहानी है ऑस्ट्रेलिया से आयी जूलिया की|

ऑस्ट्रेलिया से आयी जूलिया जब दे बैठी एक पुजारी को अपना दिल तो

जूलिया का ऑस्ट्रेलिया में एक आश्रम है जहाँ वो लोगों को योग साधना सिखाती हैं, जूलिया के आश्रम का नाम शांति द्वार है| जब जूलिया भारत आयीं तो वो यहां की संस्कृति से बहुत ज़्यादा प्रभावित हुईं, और क्योंकि पहले से ही जूलिया का आश्रम ऑस्ट्रेलिया में है, तो योग विद्या को और ज़्यादा गहराई से जाने के लिए जूलिया पहुंची योग की नगरी ‘उत्तराखंड’| उत्तराखंड में जूलिया चमोली डिस्ट्रिक्ट में बदरीनाथ पहुंची| यहां जूलिया महेश्वर आश्रम में रहने लगी, और तभी उनकी मुलाक़ात एक बाबा से हुई|

योग विद्या सीखते सीखते हुए जूलिया को बाबा से प्यार

अब जूलिया इन बाबा से योग विद्या सीखने लगीं| आपको बता दें की जूलिया का पहले विवाह हो चुका था, और इस विवाह से जूलिया के दो बेटे हैं| उनका बड़ा बेटा ऑस्ट्रेलिया में है और वह वहाँ पढ़ाई कर रहा है, जबकि छोटा बेटा अभी सिर्फ 4 वर्ष का है, और वो जूलिया के साथ भारत आया है| अब आश्रम से साथ रहते रहते जूलिया का बेटा बाबा को ही पिता शब्द से पुकारने लगा, और महाराज बर्फानी दास को ही अपना पिता मानने लगा| इसके बाद जूलिया ने बाबा से पुछा अगर वे जूलिया से शादी करेंगे|

जूलिया के इस प्रस्ताव को बाबा ने स्वीकार किया और पूरे हिन्दू रीती रिवाज़ से जूलिया से विवाह किया| आज जूलिया पूरी तरह से भारतीय संस्कृति से जुड़ चुकी हैं| यहां तक की जूलिया ने अपना नाम भी बदल दिया है और जूलिया के बदले ऋषिवन रख दिया है| इतना ही नहीं बल्कि जूलिया ने अपने दोनों बेटों के भी नाम बदल दिए हैं और बड़े बेटे का नाम विद्वान वा छोटे बेटे का नाम बदलकर विशाल रख दिया है| जूलिया आज पूरी तरह से यहां से जुड़ गयी हैं, और कई लोगों तक योग विद्या की जागरूकता पहुंचा रही हैं|

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